Mother

When the world gives up,

and so do you

And what you want is impossible,

She’s one of the few who’ll try for you.

pb

When the world knows you’ve wronged,

and so do you

And Truth seems to be the only option,

She’s one of the few who’ll lie for you.

pb

When the world knows you’ll leave soon,

and so do you

And yet when it’s time to say goodbye,

She’s one of the few who’ll cry for you.

pb

When the world waits on,

and so do you

And Uncertainty chooses to hang over your life,

She’s the only one who’ll die for you.

pb

Diwali

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देखो फिर आयी हैं दिवाली,

घर के बहार दीदी ने बनायी हैं

रंगोली अलबेले रंगो वाली।

चुपके से देखो डायबिटिक चाचू

खाये जा रहे हैं 

मिठाइयां घी वाली!

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मम्मी की बराबरी करने के चक्कर में

चाची ने जाने 

कितनी कुर्तियां सिलवाली।

यहां गुड़ियाँ के खिलोनो के साथ  साथ 

मुन्ना ने अपनी नटखट  मुस्कान

सबसे छिपाली।

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तोह वहां अपने खिलोने ढूंढते ढूंढते 

शुरू करदी गुड़ियाँ ने 

अपनी चीखों की क़व्वाली!

बड़े भैय्या ने तो जैसे घर के बाहर 

पटाखों की दूकान सी लगवाली,

मम्मी की रसोई की खुशबू ने 

सभी के मन में बेचैनी सी बढ़ाली। 

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पापा ने शायद तीसरी बार 

मन में सभी के खर्चों की लिस्ट बनाली, 

दादा दादी ने बहोत समय बाद मुझे देख 

दी एक मुस्कान बड़े दिलवाली।

सभी को देखते देखते पता नहीं 

कैसे मैंने यह कविता बनाली 

देखो फिर आयी हैं दिवाली!

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तुझसे एक फरियाद हैं माँ

यह बेकाबू बहता वक्त का दरिया मुझे अपने अंदर समा लेना चाहता हैं।

मैं इससे लड़कर तैरना नहीं चाहता माँ, अपने वश में करना चाहता हूँ।

पर तुझसे एक फरियाद हैं माँ,

भला इसका मुकाबला अकेले कैसे करूँगा मैं?
आखिर मुझे हिम्मत तुझी से आती हैं।।

जब तू मेरे पास होती हैं , निंदिया खिलखिलाकर मेरे पास आती हैं,

पर तेरी कमी में माँ , मुझे यह बुरे सपने दे जाती हैं।

तुझसे एक फरियाद हैं माँ,

तेरे बिना कैसे सो पाऊँ मैं?
जब मीठी नींद ही नहीं आती हैं।।

तेरी प्रंशसा, तेरी डाँट, तेरी हर बात के बिना ज़िन्दगी जीने में कोई मज़ा थोड़ी हैं?
इस अकेलेपन ने माँ , खुशियों के लिए जगह ही नही छोड़ी हैं।

तुझसे एक फरियाद हैं माँ,

तू मेरे सामने क्यों नही आती हैं?
आखिर मेरी खुशियां तुझमे ही समाती हैं।।

मेरी मुस्कराहट को रोककर यह घडी की सुई, ‘खुदगर्ज’, चलती ही जाती हैं।
आज शीशे में भी देखु तो माँ, उदासी ही नज़र आती हैं।

तुझसे एक फरियाद हैं माँ,

तू फ़ोन पे ही क्यों मुझसे मिलती हैं?
तेरी आवाज़ दिल तक तोह पहुचती हैं मगर,
यह आसूं नही पोछ पाती हैं।।

तुझे गले से लगाकर आज मैं खुलकर रोना चाहता हूँ।
फिर सभी गमो को भुलाकर तेरी गोद में सोना चाहता हूँ।

तुझसे कोई फरियाद नहीं माँ,

तू बस जल्दी मेरे पास आजा,
तेरी याद बहुत आती हैं।।